मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड का गठन

मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत राज्य सरकार की अधिसूचना द्वारा एक बोर्ड सथापित करने का प्रावधान रखा गया है। तदानुसार मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड जून 1973 से कार्यरत है। बोर्ड का गठन राज्य शासन की अधिसूचना क्रमांक 4802 दिनांक 04 अगस्‍त 1973 द्वारा किया गया है :-

धारा 11. मण्डी समिति का गठन-
 
(1)        मण्डी समिति में निम्नलिखित होंगे:-
()      धारा 12 के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष;
()      कृषकों के दस प्रतिनिधि जो ऐसी अर्हताएं रखते हों जैसी कि विहित की जाएं, जो किसी मंडी क्षेत्र के निर्वाचन क्षेत्रों में से इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुसार प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए हों।
स्पष्टीकरण:-    इस खण्ड में अभिव्यक्ति "कृषकों के प्रतिनिधि" के अन्तर्गत मंडी क्षेत्र का कोई ऐसा कृषक नहीं आएगा यदि ऐसे कृषक का कोई नातेदार अर्थात् पत्नी, पति, पिता, माता, भाई, बहिन, पुत्र, पुत्री, पिता का पिता, पिता का भाई, पिता की बहिन, माता का पिता, माता का भाई या बहिन, पिता के भाई का पुत्र या पुत्री, पिता की बहिन का पुत्र या पुत्री, माता के भाई का पुत्र या पुत्री, माता की बहिन का पुत्र या पुत्री, भाई का पुत्र या पुत्री, बहिन का पुत्र या पुत्री, पुत्र की पत्नी, पुत्री का पति, बहिन का पति, पत्नी की बहिन का पति, पिता की बहिन का पति, माता की बहिन का पति, पुत्र का पुत्र या पुत्री, पुत्री,का पुत्र या पुत्री, पत्नी का पिता या माता, पत्नी का भाई या बहिन, पत्नी के भाई का पुत्र या पुत्री, पत्नी की बहिन का पुत्र या पुत्री, पति का भाई, पति के भाई की पत्नी, पति के भाई का पुत्र या पुत्री, राज्य की किसी मंडी समिति से व्यापारी-अनुज्ञप्ति धारण करता है;
()       व्यापारियों का एक प्रतिनिधि जो ऐसी अर्हताएं रखता हो जैसी कि विहित जाएं, जो उन व्यक्तियों द्वारा तथा उन व्यक्तियों में से चुने जायेंगे जो इस अधिनियम के अधीन व्यापारियों के रुप में या 1[प्रसंस्करण या विनिर्माण] कारखानों के स्वामियों या अधिभोगियों के रुप में मंडी समिति से लगातार दो वर्षो की कालावधि से अनुज्ञप्ति धारण किए हों:
परन्तु किसी ऐसी मंडी समिति के मामले में, जो धारा 10 के अधीन प्रथम बार स्थापित की गई हो ऐसी मंडी समिति से अनुज्ञप्ति धारण करने की अर्हकारी कालावधि छह मास होगीः
2[परन्तु यह और कि कोई भी व्यक्ति मण्डी समिति के व्यापारियों का प्रतिनिधि होने के लिए अर्हित नहीं होगा यदि उसकी दो से अधिक जीवित संतान हैं, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी, 2001 को या उसके पश्चात् हुआ हो:,
2[परन्तु यह भी कि व्यापारी का कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि ऐसा पद धारण करने से निरर्हित हो जाएगा यदि 26 जनवरी, 2001 को या उसके पश्चात् एक संतान का जन्म हो जाए जिससे उसकी संतान की संख्या दो से अधिक हो जाती है:]
परन्तु यह 2[भी] कि कोई भी व्यक्ति एक समय में एक से अधिक मण्डी समिति का मतदाता नहीं होगा:
परन्तु यह भी कि कोई भी व्यक्ति तभी मतदाता होगा जबकि-
            (एक)  उसने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो;
            (दो)   वह मंडी समिति का व्यतिक्रमी नहीं हो.
स्पष्टीकरण:-  अभिव्यक्ति "व्यतिक्रमी" में ऐसा व्यक्ति भी आता है जिसने मध्यप्रदेश निराश्रितों एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम, 1970 (क्रमांक 12 सन् 1970) के उपबंधों के अनुसार मंडी समिति द्वारा वसूल किए जाने वाले निराश्रित शुल्क के भुगतान करने में व्यतिक्रम किया हो।
(घ)   राज्य की विधान सभा तथा लोक सभा के ऐसे सदस्य, जिनके निर्वाचन क्षेत्र की कम से कम पचास प्रतिशत जनसंख्या ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है जो किसी नगरपालिका निगम, नगरपालिका परिषद् या नगर पंचायत की स्थानीय सीमाओं के बाहर है:
परन्तु ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जहां एक से अधिक मण्डी समितियां विद्यमान हैं, वहां 1[लोकसभा के सदस्य को अपना विकल्प देना होगा] कि वह ऐसी मंडी समितियों में से किस मंडी समिति में सदस्य होना चाहता है:
1[परन्तु यह और कि लोक सभा सदस्य या राज्य विधान सभा का सदस्य जो मण्डी समिति का सदस्य है अपने प्रतिनिधि को जो ऐसी अर्हता रखता हो, जैसी कि विहित की जाय, मण्डी समिति के सम्मिलिन में उपस्थित होने के प्रयोजन के लिए नाम निर्देशित कर सकेगा;
(.)   ऐसे मण्डी क्षेत्र में कृत्य कर रही सहकारी विपणन सोसाइटी का एक प्रतिनिधि जो ऐसी सोसाइटी की प्रबंधकारिणी समिति द्वारा निर्वाचित किया जाएगा:
परन्तु यदि ऐसे मंडी क्षेत्र में एक से अधिक सोसाइटियां कृत्य कर रही हैं तो ऐसा सदस्य ऐसी सोसाइटियों की प्रबंधकारिणी समितियों के समस्त सदस्यों द्वारा निर्वाचित किया जाएगा:
परन्तु यह और भी कि इस खण्ड में की कोई भी बात लागू नहीं होगी यदि किसी सोसाइटी की प्रबंधकारिणी समिति मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 (क्रमांक 17 सन् 1961) के उपबंधों के अधीन अतिष्ठित कर दी गई है।
()       राज्य सरकार के कृषि विभाग का एक अधिकारी जो कलेक्टर द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा।
2[()    मण्डी क्षेत्र में काम कर रहे ऐसे तुलैयों तथा हम्मालों का एक प्रतिनिधि जिसे कि इस अधिनियम के अधीन किसी मण्डी समिति से ऐसे तुलैये तथा हम्माल के रुप में लगातार दो वर्षो से अनुज्ञप्ति धारण कर रहे ऐसे तुलैयों तथा हम्मालों द्वारा तथा उन्हीं के बीच से ऐसी रीति में चुना गया हो जो कि विहित की जाए:
परन्तु धारा 10 के अधीन प्रथम बार स्थापित किसी मण्डी समिति की दशा में ऐसी मण्डी समिति से अनुज्ञप्ति धारण करने की अर्हकारी कालावधि छह मास होगी;
(
)      जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक का एक प्रतिनिधि जो या तो ऐसे बैंक का अध्यक्ष होगा या उसकी प्रबंध समिति का ऐसा अन्य सदस्य होगा जो कि ऐेसे बैंक के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए।
()   जिला भूमि विकास बैंक का एक प्रतिनिधि जो या तो ऐसे बैंक का अध्यक्ष होगा या उसकी प्रबंध समिति का ऐसा अन्य सदस्य होगा जो कि ऐसे बैंक के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए।
()       मंडी क्षेत्र की अधिकारिता के भीतर आने वाली ग्राम पंचायत या जनपद पंचायत या जिला पंचायत का एक प्रतिनिधि जो जिला पंचायत के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा:
परन्तु जिला मुख्यालयों में स्थित मण्डी समितियों में ऐसा प्रतिनिधि, केवल जिला पंचायतों के सदस्यों में से ही नामनिर्दिष्ट किया जाएगा।
(2)    उपधारा (1) के अधीन समस्त सदस्यों को मत देने का अधिकार होगा, सिवाय ऐसे सदस्यों के, जो खण्ड (च) के अधीन नामनिर्दिष्ट किए गए हों और ऐसे सदस्य, जो उपधारा (1) के खण्ड (घ) के द्वितीय परन्तुक के अधीन विशेष आमंत्रित सदस्य हों।
(3)    राज्य सरकार मतदाता-सूची को तैयार करने के लिए तथा निर्वाचनों के संचालन के लिए नियम बना सकेगी।
(4)    यदि उपधारा (1) के खंड (ख) या (ग) के अधीन निर्वाचक मण्डल एक प्रतिनिधि निर्वाचित करने में असफल रहता है तो कलेक्टर यथास्थिति कृषकों या व्यापारियों का प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट करेगा।
(5)    सदस्य का प्रत्येक निर्वाचन तथा नामनिर्देशन कलेक्टर द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा।
टिप्पणी
.        मंडी समिति (कमेटी) के गठन में कौन-कौन शामिल होंगे
.       प्रत्यक्ष रुप से धारा 12 के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष
            .         कृषकों के दस प्रतिनिधि- अर्हता रखते हों
.         व्यापारियों का एक प्रतिनिधि किन व्यक्तियों द्वारा, किन व्यक्तियों में से चुना जायेगा।
            -1       व्यापारी का प्रतिनिधि होने के लिए व्यक्ति कब अर्हित नहीं होगा ?
            .         कोई भी व्यक्ति एक समय में एक से अधिक मंडी समिति का मतदाता नहीं होगा।
            .        किसी व्यक्ति के मतदाता होने की अर्हताएं
            .         व्यतिक्रमी (Defaulter)
.         - राज्य के विधान सभा के सदस्य सम्मिलन में उपस्थिति हेतु प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट कर सकेंगे
                        - लोक सभा के सदस्य प्रतिनिधि सम्मिलन में भाग लेने हेतु नामनिर्दिष्ट कर सकेंगे
- निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक मंडी समितियां होने पर सदस्यता के लिए विकल्प दिया जाना
.       सहकारी विपणन सोसाइटी का एक प्रतिनिध
                        - एक से अधिक सोसाइटियों की दशा में प्रतिनिधि का निर्वाचन
                        - अतिष्ठित सहकारी सोसाइटी की प्रबंधकारिणी से धारा 11(1) (.) का लागू होना
            .       राज्य सरकार के कृषि विभाग का एक अधिकारी
            अं.        तुलैयों- हम्मालों का लायसेन्स धारक प्रतिनधि
            अः        जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक का एक प्रतिनिधि
            आआ.   मंडी क्षेत्र की अधिकारिता के भीतर स्थित पंचायत का एक प्रतिनिधि,
            इइ.       मतदान का अधिकार किसको रहेगा ?
            उउ.       नामनिर्दिष्ट
                        - विशेष आमंत्रित सदस्य
- धारा 11 की उपधारा(1) के खंड () या () के अधीन प्रतिनिधि के निर्वाचन में असफलता पर नाम निर्दिष्ट होना एवं राजपत्र में प्रकाशन
.        मंडी समिति के गठन में कौन-कौन सदस्य शामिल होंगे:-
(1) मंडी कमेटी के गठन में धारा 11 की उपधारा के खण्ड () के अनुसार मंडी कमेटी का अध्यक्ष धारा 12 के अधीन निर्वाचित होगा,
(2) कृषकों के दस प्रतिनिधि
(3) व्यापारियों का एक प्रतिनिधि (प्रतिनिधि बनने के लिए कब अर्हित नहीं होगा? (धारा 11(1) () का दूसरा परन्तुक)
(4)  A. राज्य विधान सभा का सदस्य


मंत्री जो कि किसान कल्‍याण तथा कृ‍षि विकास विभाग, मध्यप्रदेश का भारसाधक हो बोर्ड का अध्‍यक्ष होगा तथा बोर्ड के नामांकित सदस्‍यों में से उपाध्‍यक्ष का नामनिर्देशन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।